इंदौर में चूड़ी बेचने वाले एक मुसलमान शख़्स को कथित तौर पर मज़हब की वजह से पीटा गया और धमकी दी गई कि चूड़ी बेचने हिंदुओं के इलाक़े में न आया करें जैसी घटना के बाद अब कई सवाल खड़े हो गए है।

लेकिन राज्य के गृहमंत्री ने इसे अलग तरह से पेश किया है।

भोपाल में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पत्रकारों से कहा, “वो हिंदू नाम से वहाँ सामान बेच रहा था. वो दूसरे समुदाय से था। इसी तरह के दो आधार कार्ड भी मिले हैं। बेटियों को बहुओं को सावन के दिन चूड़ियां पहनाने की हमारे यहां ज़्यादा परंपरा है। वहां से विवाद शुरू हुआ था और उसके बाद दोनों पक्षों पर कारवाई हुई। “

वहीं सुप्रीम कोर्ट के एक वकील एहतेशाम हाशमी का कहना है कि इस मामले में राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून (एनएसए) लगाया जाना चाहिए।

गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के बयान पर उन्होंने कहा कि अगर वह व्यक्ति हिंदू नाम से वहां चूड़ियां बेच रहा था तो फिर उनका असली नाम कैसे पता चला और अगर उनके पास दो आधार कार्ड थे तो उस पर कार्रवाई पुलिस को करना चाहिए न कि लोगों को।

उन्होंने कहा, “उसे मारने का हक़ किसी को भी नहीं है। इस मामले में एनएसए के तहत कार्रवाई करने का प्रयास किया जा रहा है.”

सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि इस तरह की कार्रवाई भीड़ तंत्र को मजबूत बनाती हैं। फिल्म प्रोड्यूसर विनोद कापड़ी ने लिखा कि दिन भर मेहनत करके 100-150₹ कमाने वाले तस्लीम पर ऐसी धाराएँ लगा दी गई हैं कि अब वो ना जाने कितने हफ़्तों तक जेल में रहेगा और उसे मारने वाले दो दिन में बेल पा जाएँगे। इस देश में मुसलमान होना कितनी बड़ी सजा हो गई है। मोदी की नफ़रत देश को जला रही है।

@satishshukla2 टि्वटर अकाउंट से कमेंट किया गया कि लोग तालिबान को ताना दे रहे है आखिर यहां तो सबका विश्वास के नाम पर एक दुसरा तालिबान शासन है। जहा मर्यादा पुरोषतम राम के नाम पर कितने ही लोगों की बलि दी गई ,एक गरीब जो सिर्फ पेट पालने के लिए निकला था उसे जेल में डाला गया। शर्मनाक सुशासन। एक टि्वटर यूजर ने लिखा कि सरकार को सत्ता का लोभ है। इस सत्ता के लिए ये लोग किसी भी हद तक चले जाएंगे। यूपी इलेक्शन आने वाले हैं इसलिए अभी और गंदी राजनीति होनी बाकी है।

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