देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बड़ी खबर सामने आई है। कहा जा रहा है कि भलस्वा डंपिंग साइट का एक हिस्सा भरभराकर गिर गया है।

इसकी चपेट में आने से कई झुग्गीनुमा मकान मलबे में दब गए है। इस घटना से आसपास के इलाके में सनसनी फैल गई है। वहीं, सूचना के बाद स्थानीय थाना पुलिस भी मौके पर पहुंच गई।

लेकिन गनीमत रही कि इस हादसे में किसी के भी घायल होने की सूचना नहीं है। लोगों को घर से बाहर सीढ़ियों के माध्यम से निकाल लिया गया है. फिलहाल, मलबा हटाने का काम किया जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, सोमवार सुबह भलस्वा डंपिंग साइट का कूड़े के ढेर से बना एक पहाड़नुमा बड़ा हिस्सा आसपास की झुग्गियों पर जा गिरा।

इस डंपिंग साइट के पास में झुग्गीनुमा घर बने हुए हैं, जिनमें काफी लोग भी रहते है। अचानक से मलबा गिरने से लोगों के घरों के दरवाजे तक बंद हो गए।

ऐसे में लोगों को सीढ़ियों के द्वारा छतों के ऊपर से निकाला गया। गनीमत रही कि इसमें कोई घायल नहीं हुआ। भलस्वा लैंडफिल साइट के पास श्रद्धानंद कॉलोनी की झुग्गियों की तरफ ये मलबा गिरा है। फिलहाल प्रशासन द्वारा यहां मलबा हटाने का काम जारी है।

बारिश के दौरान पूरी डंपिंग साइट दलदल हो गई है। साथ ही और भी ज्यादा इस डंपिंग साइट का हिस्सा गिरने का डर बना हुआ है।

बता दें कि दिल्ली में सबसे बड़ा कचरे का पहाड़ गाजीपुर में है। पिछले साल खबर सामने आई थी कि पूर्वी दिल्ली नगर निगम का दावा है कि पिछले एक साल में ये कचरे का पहाड़ 40 फीट कम हुआ है।

एक बार तो गाजीपुर के कचरे के पहाड़ की ऊंचाई ताज महल से भी ज्यादा हो गई थी।

लैंडफिल की लगातार बढ़ रही ऊंचाई को देखते हुए पिछले साल सितंबर के महीने में यहां ट्रोमिल मशीनें लगाई गई थी।

ये मशीनें हर दिन करीब 2400 मीट्रिक टन कचरे को प्रोसेस करती हैं, जिससे मिट्टी बनाई जाती है और बचे हुए कूड़े को वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में भेजा जाता है।

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