उत्तर प्रदेश पर्यटन वि‍भाग द्वारा आयोजित टुरिज़म वेलफ़ेयर ऐसोसिऐशन के सदस्यों की तीन रात्रि चार दिवसीय (17 अगस्त से 20 अगस्त) यात्रा शुक्रवार को सम्पन्न हो गयी।

टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन (टीडब्लूए) के अध्यक्ष राहुल मेहता ने बताया कि उत्तर प्रदेश पर्यटन के संयोजन में संस्था द्वारा जौनपुर, सोनभद्र, चुनार-मिर्ज़ापुर के टूर के बाद प्रयागराज- चित्रकूट-अयोध्या का भ्रमण किया गया, जिसका उद्देश वाराणसी के आसपास सभी प्रमुख ईको व धार्मिक पर्यटक स्थलों को जोड़ कर एक केंद्रिकृत पैकेज बनाना है। संस्था द्वारा भ्रमण की सम्पूर्ण रिपोर्ट उत्तर प्रदेश पर्यटन को जल्द ही दी जाएगी।

यात्रा के प्रथम दिन सदस्यों ने प्रयागराज के ऐतिहासिक व धार्मिक स्थलों का भ्रमण किया जिसमें प्रमुख रूप से भारद्वाज आश्रम जो कभी ऋषि भारद्वाज का आश्रम था और जहां राम उनसे मिले थे।


उसके बाद अल्फ्रेड पार्क का भ्रमण हुआ, जो 150 साल पुराना सार्वजनिक पार्क है, जिसे प्रिंस अल्फ्रेड (सक्से-कोबर्ग और गोथा के राजकुमार अल्फ्रेड) की दिसंबर 1869 में इलाहाबाद यात्रा के लिए बनाया गया था। बाद में इसका नाम बदलकर चंद्रशेखर आजाद पार्क कर दिया गया।

सदस्यों ने उसके बाद इलाहाबाद संग्रहालय – थॉर्नहिल मेने मेमोरियल का दौरा किया, शाम को विरासत की सैर के लिए खुसरो बाग जो कि 16 वीं शताब्दी के मुगल समाधि के लिए जाना जाता है। यहाँ सदस्यों के साथ क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी अपराजिता सिंह भी उपस्‍थि‍त थीं।


दूसरे दिन सदस्यों ने चित्रकूट का भ्रमण किया जिसमें मुख्यतः राम दरबार, गुप्त गोदावरी जहाँ पहाड़ों के बीच है दो गुप्त गोदावरी गुफाएं है। बात दें कि वनवास के दौरान भगवान राम यहां रुके थे।

उसके बाद सती अनुसुइया से स्फटिक शीला यह एक चट्टान है। उसमें भगवान राम और सीता के पैरों के निशान हैं। सबसे सुहावना दृश्य शीला के बगल से मंदाकिनी नदी निकलती है। उसके जल और प्राकृतिक दृश्य की सुंदरता अद्भुत है।

कामथनाथ मंदिर व पर्वत, हनुमान धारा यहाँ के बारे में कहा जाता है की जब श्री हनुमान जी ने लंका में आग लगाई उसके बाद उनकी पूंछ में लगी आग को बुझाने के लिए वो इस जगह आये, जिन्हे भक्त हनुमान धारा कहते हैं।

चित्रकूट के सभी स्थलों का भ्रमण करते हुए राम घाट की विरासतयात्रा की और आरती में सम्मिलित हुए। चित्रकूट भ्रमण के दौरान क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी शक्ति सिंह उपस्तिथ थे।

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