आशियाना स्थित लोकबंधु अस्पताल में पहले एंटी रेबीज लैब बनाए जाने के प्रस्ताव को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने हरी झंडी दे दी है।

चिकित्साधिकारियों के अनुसार लैब के शुरू होने के बाद रेबीज से जुड़ी जांचों को दिल्ली व अन्य शहरों में भेजने के झंझट से निजात मिलेगी। त्वरित जांच के साथ ही बीमारी का बेहतर इलाज भी पीडि़त को मुहैया हो सकेगा।

केंद्र सरकार की ओर से प्रदेश में एंटी रेबीज लैब बनाए जाने के लिए निर्देश दिए गए थे। इसके बाद लोकबंधु अस्पताल प्रशासन ने सक्रिय भूमिका निभाई। प्रस्ताव तैयार कर महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाओं को भेजा गया।

वहीं अब केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भी प्रस्ताव पर स्वीकृति दिए जाने की अनौपचारिक घोषणा कर दी गई है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार लैब तैयार करने में लगभग एक करोड़ रुपये खर्च आएगा।

सरकार ने बजट स्वीकृत कर दिया है। इसके तहत एंटी रेबीज लैब में माइक्रोबायोलाजी लैब (माइक्रोबायोलाजिस्ट, दो लैब टेक्नीशियन, डाटा एंट्री आपरेटर) शामिल रहेंगे।

6 बेड का होगा वार्ड योजना के तहत अस्पताल परिसर में बनने वाले लैब के साथ एक डेडीकेटेड वार्ड भी होगा। शुरुआती दौर में वार्ड में छह बेड होंगे। बाद में इनकी संख्या बढ़ाई भी जा सकती है। इन वार्डां में मरीजों की भर्ती के साथ साथ उन पर अध्‍ययन भी किया जा सकेगा।

क्या है रेबीज डा. अजय शंकर त्रिपाठी बताते हैं कि रेबीज एक वायरल डिजीज है। यह कुत्तों, बंदरों आदि के काटने से फैलता है। रेबीज से व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है। पीडि़त व्यक्ति को पानी से डर लगने लगता है। वह जोर-जोर से चिल्लाने सहित पागलों सा व्यवहार करता है।

लोकबंधु अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. अजय शंकर त्रिपाठी ने बताया कि भारत सरकार के निर्देश पर पत्राचार किया गया है। अनौपचारिक रूप से स्वीकृति मिल गई है। जल्द ही लैब का तैयार होगा।

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