अफगानिस्तान से आने वाले सूखे मेवे पर तालिबानी छाया का ग्रहण बाजार पर दिखने लगा है। रोज बढ़ रही कीमतों से सूखा मेवा इस त्योहारी सीजन में पहुंच से दूर होता नजर आ रहा है।

पेशावरी हरा पिस्ता हो या फिर अंजीर एवं बादाम और अखरोट गिरी, सभी के दाम में तेजी से उछाल बना हुआ है।

बाजार में हैं विकल्प अस्थायी फेज है चिंता जैसी बात नहीं
हालांकि कारोबारी इसे अस्थायी फेज मानते हैंं वह कहते हैं कि बाजार में विकल्प हैं। अमेरिकन बादाम और अखरोट गिरी के अलावा अफ्रीका और भारत के विभिन्न प्रांतों से आने वाला काजू, हींग, किशमिश आदि मेवा लोगों का पसंदीदा है। हां, अफगानी हरा पिस्ता बेहतर होता है उस पर अंतर आएगा। लेकिन विकल्प कम नहीं हैं।

त्योहार और सर्दी में खपत ज्यादा, माल कम, बाजार रहेगा गर्म: सावन खत्म होते ही रक्षाबंधन पर्व के साथ त्योहारों की शुरुआत हो जाती है। ऐसे में मिष्ठान से लेकर नमकीन तक में मेवे का जमकर उपयोग होता है।

मांग बढ़ने के साथ ही कीमतों में लगातार होती बढ़ोत्तरी आगामी दिनों में बाजार गर्म रखने के संकेत दे रही है। और तो और दीपावली के साथ ही ठंडक की दस्तक होने लगती है। इनमें भी ड्राई फ्रूट की मांग खूब रहती है। ऐसे में खपत अधिक और माल कम हाेने से दाम चढ़ने की संभावना बनी हुई है।

लखनऊ किराना कमेटी सदस्य व कारोबारी विनोद अग्रवाल ने कहा कि अफगानिस्तान से आने वाले सूखे मेवे में तेजी बनी हुई है। करीब हफ्तेभर से कीमतों में उछाल बना हुआ है।माल कम खपत ज्यादा हाेने से भाव चढ़ा है लेकिन परेशानी जैसी बात नहीं है।

बाजार में इसके बेहतरीन विकल्प हैं। अमेरिका की बादाम और अखरोट गिरी, अफ्रीका और भारत के विभिन्न प्रांतों से आने वाला काजू और किशमिश आदि मेवा जरूरत आसानी से पूरी कर देगा।

सुभाष मार्ग, मेवा कारोबारी अमित अग्रवाल ने कहा कि तालिबानी संकट का असर मेवा बाजार पर है। चार-पांच आइटम की कीमतों पर असर साफ तौर पर नजर आ रहा है। इनमें हरा पिस्ता, बादाम गिरी, अखरोटगिरी, अंजीर आदि मेवा तेज हुए हैं। किशमिश, हींग, काजू समेत कई अन्य मेवों का विकल्प भारतीय बाजार में है।

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