कौशांबी के संयुक्त जिला चिकित्सालय में 15 अगस्त को वॉर्मर में नवजात के जिंदा जलकर मौत के मामले में गंभीरता नहीं बरती जा रही है। इस दिल दहला देने वाली घटना को एक हफ्ते हो गए, लेकिन अभी तक किसी पर कार्रवाई नहीं हुई है।

उधर, परिवार अभी तक सदमे में है। उसकी पीड़ा है कि बच्चे की देखरेख करने वाले मोबाइल पर गेम खेल रहे थे, अब लगता है प्रशासन कार्रवाई में खेल कर रहा है।

कार्रवाई न होती देख बाल कल्याण समिति ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सीएमएस को नोटिस जारी किया है। एक हफ्ते में जवाब देने के लिए कहा है। इस मामले को दैनिक भास्कर ने प्रमुखता से उठाया।

लापरवाही और अधिकारियों की अनदेखी को सामने लाने के बाद अब पीड़ित परिवार के घर जाकर बात की है। आप भी जानिए, इस एक हफ्ते में सिस्टम की संवेदनहीनता परिवार की तकलीफ को कैसे और बढ़ा रही है।

तब वाहवाही मिली, अब कार्रवाई क्यों नहीं

साल 2017 में तत्कालीन जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने अपनी पत्नी अंकिता राज का कौशांबी के इसी सरकारी अस्पताल में डिलीवरी कराकर खूब वाहवाही लूटी थी। उस समय सीएमएस डॉ. दीपक सेठ ही अस्पताल में अधीक्षक थे, और अब इस गंभीर मामले में भी वही यहां तैनात हैं। जाहिर है, सामान्य लोगों के लिए अस्पताल की व्यवस्था बेहद खराब है।

अस्पताल व्यवस्था की जिम्मेदारी सीएमएस डॉ. दीपक सेठ की है, पर वह इस घटना को बहुत ही हल्के तौर पर ले रहे हैं। वहीं, डीएम और सीएमओ ने भी बच्चे की मौत को सामान्य ही माना है। बच्चे के माता-पिता बार-बार पूछ रहे हैं, कि अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई और जिम्मेदार कौन है।

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