सभी जातियों के अभ्यर्थियों को मंदिरों में पुजारी नियुक्त करने का अपना चुनावी वादा पूरा करते हुए तमिलनाडु की द्रमुक नीत सरकार ने शनिवार को विभिन्न जातियों के 24 प्रशिक्षित ‘अर्चकों’ यानि पुजारियों को नियुक्ति दी है।

मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने विभिन्न श्रेणियों में पदों पर नियुक्ति करते हुए 75 लोगों को ‘हिन्दू धर्म और परमार्थ अक्षय निधि विभाग’का नियुक्ति आदेश सौंपा

मुख्यमंत्री के बयान से पहले हिंदू धर्म और परमार्थ प्रदाय (एचआरसीई) मंत्री पी के सेकर बाबू ने कहा था कि किसी भी ब्राह्मण पुरोहित को निशाना नहीं बनाया गया है और यह कि उनके विभाग के अंतर्गत आने वाले मंदिरों में पुरोहित के रूप में सभी जातियों के लोगों की नियुक्ति करके किसी प्रकार का कोई उल्लंघन नहीं किया गया है।

स्टालिन ने कहा कि ‘थंथाई पेरियार के हृदय के कांटों’ को हटाने के इच्छुक दिवंगत मुख्यमंत्री कलैगनार की कानूनी पहल को लागू करते हुए उनकी नियुक्ति की गयी है जिन्हें मंदिरों में पुरोहित कार्य करने के लिए ट्रेनिंग दी गई।

तमिलनाडु के मंदिरों में ग़ैर-ब्राह्मण पुजारियों की नियुक्ति के बाद। त्रिची के प्रसिद्ध ऐतिहासिक वायलुर मुरुगन मंदिर के नए अब्राह्मण पुजारी एस. प्रभु और एस. जयबालन। एस. प्रभु के पिता दर्ज़ी हैं। पुजारी बनने के लिए दोनों ने ट्रेनिंग ली थी और परीक्षा पास की थी।

स्टालिन का कहना है कि कुछ लोग इस कदम को बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और उन्होंने इस पहल को पटरी से उतारने की कोशिश के तहत सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया।

तमिलनाडु में भी सरकार के इस फैसले का कई लोग विरोध कर ररे हैं तो कुछ लोग इसके पक्ष में भी हैं। विरोध करने वालों को लेकर CM स्टालिन का कहना है कि कुछ लोगों ने या तो अपने राजनीतिक झुकाव के कारण इस कदम के विरूद्ध काम किया, या वे बस इस पहल को मटियामेट कर देना चाहते हैं जबकि इसका लक्ष्य सामाजिक न्याय लाना है।

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