हरियाणा के भिवानी में स्‍वतंत्रता ‌दिवस कार्यक्रम के दौरान तब बेहद शर्मिंदगी भरा द्रश्य सामने आया जो भाजपा के जातिवादी सोच को खोलकर रख दिया ।

भाजपा के एक अनुसूचित जाति के विधायक को बैठने के लिए कुर्सी ही नहीं दी गई । इस घटना के बाद बवानीखेड़ा से भाजपा विधायक विशम्भर सिंह बाल्मीकि इतने नाराज हुए कि वे तुरंत कार्यक्रम छोड़कर वापस जाने लगे।

विधायक को वापस जाता देख अधिकारियों दवारा तुरंत कुर्सी का इंतजाम किया गया और उनको मनाने की कोशिश की जाने लगी।

लेकिन विशम्भर सिंह बाल्मीकि ने नाराजगी जताते हुए कहा, “मैं इस्तीफा दे सकता हूं, लेकिन उस स्टेज पर फिर से नहीं बैठूंगा।”

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक, भाजपा विधायक ने अधिकारियों से कहा “मैं गुलाम हूं। बैठने के लिए मुझे सीट तक नहीं दी गई। ऐसा कब तक चलेगा। यही चलता रहा तो मैं इस्तीफा भी दे दूंगा।”

इस घटना के बारे में भिवानी के डिप्टी कमिश्नर अंशज सिंह का कहना है कि उन लोगों ने आंगतुकों के बैठने के लिए उचित व्यवस्था की थी।

एक एसएचओ पूरी व्यवस्था देख रहे थे, जब विधायक मंच पर आए तो स्वतंत्रता दिवस का कार्यक्रम चल रहा था और सभी लोग उसी में व्यस्त थे, कुछ लोग विधायक के लिए निर्धारित सीट पर बैठ गये इसी वजह से गलतफहमी पैदा हुई, भेदभाव का तो कोई सवाल ही नहीं है।

हालांकि कुछ देर की नाराजगी के बाद विधायक मंच पर आने के लिए तैयार हो गये, तब उन्हें एक दूसरे विधायक के बगल में बैठने के लिए कुर्सी दी गई।

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