कानपुर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे जालसाज को अरेस्ट किया, जो फर्जी आईपीएस ऑफिसर बनकर लोगों पर रौब गांठता था। फर्जी आईपीएस को एक असली आईपीएस अधिकारी को फोन करना भारी पड़ गया।

फर्जी आईपीएस डीसीपी ट्रैफिक को फोन कर गाड़ी छुड़ाने का दबाव बना रहा था। डीसीपी ट्रैफिक बीबीजीटीएस मूर्थी को फर्जी आईपीएस पर शक हुआ तो उन्होने फौरन इसकी सूचना क्राइम ब्रांच को दी। क्राइम ब्रांच ने जाल बिछाकर फर्जी आईपीएस को गिरफ्तार कर लिया।

नौबस्ता थाना क्षेत्र स्थित शकंराचार्य नगर में रहने वाले आशुतोष त्रिपाठी सरकारी टीचर हैं। आशुतोष त्रिपाठी किदवई नगर स्थित घनश्यामदास शिवकुमार सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बच्चों को पढ़ाते हैं।

जानकारी के मुताबिक, आशुतोष कभी खुद को रॉ एजेंट तो कभी आईपीएस ऑफिसर बताकर अपने और अपने मिलने वालों के काम कराता था। इसके लिए लोगों पर रौब गांठकर दबाव बनाता था

हैलो मैं IPS बोल रहा हूं…
फर्जी आईपीएस ऑफिसर आशुतोष त्रिपाठी ने बीते 16 अगस्त को डीसीपी ट्रैफिक बीबीजीटीएस मूर्थी को कॉल किया। उनसे कहा कि मैं आईपीएस बोल रहा हूं।

मेरे एक मिलने वालों का चालान हो गया है, क्या चालान निरस्त हो सकता है। जब डीसीपी ट्रैफिक ने पूछा कि आप किस बैच के आईपीएस हैं तो आशुतोष ने संतोषजनक जवाब नहीं दिया।

डीसीपी ट्रैफिक को बताया पैर में लगी है गोली
फर्जी आईपीएस ने कहा कि मेरे पैर में 01.05 mm की गोली लगी है। मैं घायल हूं, नहीं तो आप से मिलने के लिए जरूर आता। जब डीसीपी ट्रैफिक ने पूछा कि गोली कैसे लगी तो फर्जी आईपीएस उस बात को टाल गया।

डीसीपी ट्रैफिक को कुछ शक हुआ तो उन्होंने इसकी सूचना क्राइम ब्रांच को दी। क्राइम ब्रांच ने सुनियोजित तरीके से उसे दबोच लिया।

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