कुंभ मेला-2019 को ‘दिव्य-भव्य’ बनाने के लिए केंद्र व प्रदेश सरकार कोई कसर नहीं छोडऩा चाहती थी। हर कार्य विश्वस्तरीय करने का खाका तैयार किया गया, जिसका फायदा उठाकर अधिकारियों ने खूब मनमानी की।

बेरीकेडिंग से लेकर भूमि समतलीकरण तक में चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए नियम विरुद्ध काम कराए गए। नियंत्रक-महालेखापरीक्षक की आडिट रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। स्थिति यह रही कि बाइक, कार व मोपेड के नंबर पर ट्रैक्टर पंजीकृत किए गए थे।

ट्रैक्‍टरों के पंजीकरण नंबर मोपेड, बाइक व कार के थे
प्रधान महालेखाकार के अनुसार कुंभ मेलाधिकारी ने मेला क्षेत्र में भूमि समतलीकरण अक्टूबर-नवंबर 2018 में तीन ठेकेदारों मेसर्स नारायण एसोसिएट्स, स्वास्तिक कंस्ट्रक्शन और मेसर्स मां भवानी कंस्ट्रक्शन से कराया था।

सेक्टर पर्यवेक्षकों और सेक्टर मजिस्ट्रेटों द्वारा प्रमाणित सत्यापन रिपोर्ट में समतलीकरण कार्य के लिए लगाए गए ट्रैक्टरों की पंजीकरण संख्या का महत्वपूर्ण विवरण नहीं था।

लेखा परीक्षा ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय प्रयागराज के अभिलेखों से मेसर्स स्वास्तिक कंस्ट्रक्शन के नाम पर दर्ज 32 टै्रक्टरों की पंजीकरण संख्याओं का सत्यापन किया, जिसमें चार ट्रैक्टरों के पंजीकरण नंबर एक मोपेड, दो बाइक और एक कार के थे।

नियम विरुद्ध टेंडरिंग से पूर्व आगणन नहीं तैयार किया था
इतना ही नहीं, बेरीकेडिंग के कार्य में कुंभ मेला अधिकारी ने 27 नवंबर 2018 को 160 और 180 रुपये प्रति रनिंग फीट की दर से एक फर्म के साथ अनुबंध किया। इसके अलावा गृह (पुलिस) विभाग ने उसी फर्म से कुंभ मेलाधिकारी द्वारा निर्धारित दरों पर बेरिकेडिंग कराई।

लेखा परीक्षा जांच में पता चला कि मेलाधिकारी ने नियम के विरुद्ध टेंडरिंग प्रक्रिया शुरू करने से पहले बेरीकेडिंग कार्य के लिए आगणन तैयार नहीं किया था।

इसके अलावा अनुबंधित दरें तर्कसंगत नहीं थीं, क्योंकि लोक निर्माण विभाग ने मेला क्षेत्र में उसी बेरीकेडिंग को 46 रुपये प्रति रनिंग फीट की दर से एक अन्य ठेकेदार के साथ 15 नवंबर 2018 को अनुबंध किया था। इसी कारण बेरीकेडिंग कार्यों में 3.24 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च हुए हैं।

ठेकेदारों को दिया लाभ
कुंभ मेला के दौरान गंगा व यमुना में 22 पांटून पुल बने थे। अभिलेखों की जांच से पता चला कि यह कार्य दो ठेकेदारों से कराया गया। दोनों ठेकेदारों की बिड (केवल 61.44 लाख रुपये) क्षमता सीमा से कम थी। फिर भी उन्हें अनुबंध प्रदान किए गए थे। इस प्रकार ठेकेदारों को अनुचित लाभ दिया गया।

कर्मचारियों का हक मारा
कुंभ मेले के सफाई कर्मचारियों को उनके भविष्य निधि के हक से वंचित कर दिया गया। आडिट रिपोर्ट के मुताबिक कुंभ में 9483 कर्मचारी स्वच्छता के काम में लगे थे। उन्हें मजदूरी के रूप में 24.91 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया, लेकिन कर्मचारी भविष्य निधि योगदान नहीं दिया गया।

10 की जगह लगाए गए 55 कंपैक्टर
प्रयागराज नगर निगम ने कुंभ मेला क्षेत्र से कूड़ा उठाने के लिए 40 कंपैक्टर 13.27 करोड़ रुपये में खरीदे। इसके अलावा भी 15 कंपैक्टर लगाए गए थे। कुंभ मेले में 76 दिनों में 55 में से 22 कंपैक्टरों ने मात्र एक से 10 ट्रिप लगाए।

अन्य 22 कंपैक्टरों ने 11 से 30 ट्रिप लगाए, जबकि बाकी 11 कंपैक्टरों ने 31 से 56 ट्रिप पूरी की थी। कुल 55 कंपैक्टरों ने 9746 मीट्रिक टन नगरीय ठोस कूड़ा ढोया था। लेखा परीक्षा ने आंकलन किया कि 9746 मीट्रिक टन कूड़ा ढोने का काम केवल 10 कंपैक्टर से किया जा सकता था।

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