चीफ जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता में हुई कॉलेजियम की बैठक में सुप्रीम कोर्ट में जजों के खाली पड़े 9 पदों के लिए नामों की सिफ़ारिश सरकार को भेजी गई है।

लेकिन इस लिस्ट में SC/ST/OBC की एक भी महिला जज को शामिल नहीं किया है। सुप्रीम कोर्ट ने कुल 3 महिला जजों के नाम भेजे हैं और उसमें भी 2 ब्राह्मण महिला जज हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील नितिन मेश्राम ने जजों की जातिवार संख्या बताते हुए कहा कि जज किसी राजनेता से कम नहीं होते।

बल्कि जज सबसे चालाक राजनेता हैं। इस दौरान उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट में कुल न्यायाधीश की संख्या 33 है, जिसमें सवर्ण समाज से 28 और अन्य जातियों से सिर्फ 5 न्यायाधीश शमिल है। नितिन मेश्राम ने ये जानकारी अपने ऑफिशियल ट्वीटर हैंडल से ट्वीट कर दी है।

नितिन मेश्राम ने लिखा, 9 जजों की नियुक्ति के बाद, सुप्रीम कोर्ट के 33 जजों मे 1 ओबीसी जज होगा। बाक़ी 11 ब्राह्मण, 8 वैश्य, 5 क्षत्रिय, 4 कायस्थ, 2 अनुसूचित जाति, 1 मुस्लिम, 1 क्रिश्चियन समुदाय के जज होंगे। अनुसूचित जनजाति से कोई जज नहीं होगा। महिला जजों मे 3 ब्राह्मण और 1 खत्री समुदाय की महिला जज होगी।

कॉलेजियम की सिफारिश में वरिष्ठ वकील पीएस नरसिम्हा, जस्टिस एएस ओका, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस जेके माहेश्वरी, जस्टिस सीटी रवींद्र कुमार और जस्टिस एमएम सुंदरेश समेत तीन महिलाओं में जस्टिस बीवी नागराथन, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस बेला त्रिवेदी के नाम शामिल हैं। अगर केंद्र सरकार कॉलेजियम की इन सिफारिशों को मान लेती है तो भविष्य में सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ इन्हीं चंद जातियों के जज ही देखने को मिलेंगे।

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