आरक्षण के मुद्दों पर बहस होती रही लेकिन 70 वर्षों में आरक्षित वर्गों को उनका हक नहीं मिला, परन्तु आरक्षण भोगी का ठप्पा समाज ने उनपर लगा दिया।

उच्च शिक्षण संस्थानों से लेकर बड़े नौकरी -पेशा और कारखानों में आये दिन ऐसे मामले सामने आते है जो इस बात को चीख़ कर बताते है कि यहाँ जातिवादी व्यवस्था आज भी मायने रखती है । चाहे वह दिल्ली यूनिवर्सिटी हो या फिर IIT खरगपुर जैसे संसथान जो हाल में चर्चा के विषय बने रहे।

नेशनल सैंपल सर्वे ऑर्गनाइजेशन (NSSO) के एक सर्वेक्षण में देश में ओबीसी की आबादी 40.94%, SC की जनसंख्या 19.59%, ST की आबादी 8.63% और बाकी की 30.80% थी। लेकिन इन जातियों की भागीदारी अभी भी इनकी संख्या के अनुपात में नहीं हुयी।

केंद्र के द्वारा दिया गया आरक्षण

वर्गकितना आरक्षण
अनुसूचित जाति (SC)15 %
अनुसूचित जनजाति (ST)7.5 %
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)27 %
कुल आरक्षण49.5 %

अब जरा सामाजिक शैक्षणिक और नौकरी पेशा प्राप्त लोगों का आकलन करें। या फिर पुरानी ख़बरों का आकलन करते है तो क्या मिलता है ?

केंद्रीय नौकरियों का क्या है हाल?  

  • रेलवे में कुल 16381 पद हैं, जिसमें 1319 (8.05%) पिछड़े और 11273 (68.72%) सवर्ण कर्मचारी हैं।
  • 71 विभागों में कुल 343777 पद हैं, जिसमें 51384 (14.94%) पिछड़े और 216408 (62.95%) सवर्ण कर्मचारी हैं।
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय में कुल 665 पद हैं, जिसमें 56 (8.42%) पिछड़े और 440 (66.17%) सवर्ण कर्मचारी हैं।
  • कैबिनेट सचिवालय में कुल 162 पद हैं, जिसमें 15 (9.26%) पिछड़े और 130 (80.25%) सवर्ण कर्मचारी हैं।
  • राष्ट्रपति सचिवालय में कुल 130 पद हैं, जिसमें 10 (7.69%) पिछड़े और 97 (74.62%) सवर्ण कर्मचारी हैं।

इन आकड़ों के आधार पर एक बात तो साफ हो जाती है करीब 80% से ऊपर के सरकारी नौकरी, उच्च शिक्षण संस्थाओं में मात्र कुछ जातियां ठाकुर,ब्राह्मण, वैश्य, कायश्थ विराजमान है।

अब सवाल है कि जिन जातियों की कुल भागीदारी ही मात्र 14 % के आस -पास है वे 80 % पर कब्ज़ा कर रखे है जबकि EWS के नाम पर 10 % आरक्षण उनके लिए फिक्स किया गया है। जो उनकी संख्या के आस – पास है।

आये दिन आरक्षण पर ज्ञान देने वाले जरा सोंचे जिनकी भागीदारी मात्र 14 % है। वे 10 %EWS का आरक्षण ले रखा है। जो पहले से सामाजिक और आर्थिक रूप से सैकड़ो पीढ़ीयो से मजबूत है।

वंही आरक्षित पदों पर भी इनका कब्ज़ा है। ऐसे में जरूरी है जातिवार जनगड़ना हो और उनकी जाति के हिसाब से उनको आरक्षित किया जाए और शेष हिस्से को ओबीसी को दे दिया जाए ताकि सही न्याय हो।

जो कुछ इस प्रकार होगा
वर्ग आरक्षण
सामान्य जनसंख्या की भागीदारी का प्रतिशत %
अनुसूचित जाति जनसंख्या की भागीदारी का प्रतिशत %
अनुसूचित जनजाति जनसंख्या की भागीदारी का प्रतिशत %
शेष ओबीसी को पूरा क्यूंकि ओबीसी में कई जातियां है
इस तरह से ओबीसी को 40 %से अधिक आरक्षण से व्यवस्था हो जयेगी

अगर 70 वर्ष बाद भी आरक्षित लोगों को उनका लाभ या अधिकार नहीं मिला है जरूरी है। जातियों को उनकी जातिवॉर जनगड़ना करके उनके लिए आरक्षण की व्यवस्था कर देना चाहिए साथ उन पहले से नौकरी में व्यप्त जातियों की जानकारी हो ताकि उसका हिसाब भी बराबर किया जा सके।

(नोट; प्रस्तुत लेख वर्तमान आरक्षण की बहस और राजनेतओं द्वारा दिए जा रहे सुझाओं का आकलन के आधार है। जिसमे लेखक के स्वंय के विचार हो सकते है )

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