एक तरफ कोरोना महामारी ने आर्थिक रूप से लोगों को कमजोर बना दिया है। वहीं दूसरी तरफ महंगाई ने लोगो का कचूमर निकाल रखा है ऐसे में सरकार ने गरीबो को निशुल्क इलाज के लिए व्यवस्था शुरू की है। जिसके तहत अब गरबों को 1 रुपये वाला इलाज 100 रुपये में मिलेगा।

जिससे आम जन मांस की की जेब को और ढीला करने को मजबूर कर दिया जायेगा महंगाई का असर हर तरफ देखने को मिल रहा है। धीरे-धीरे कीमतों में इजाफा लोगों के लिए बड़ी समस्या बनता जा रहा है। लोहिया संस्थान की बात करें तो यहां पहले एक रुपये में पंजीकरण उपलब्ध होता था लेकिन अब मरीजों को इलाज के लिए ज्यादा पैसे अदा करने होंगे।

दरअसल, गोमतीनगर में 467 बेड का लोहिया संयुक्त चिकित्सालय संचालित था। यहां एक रुपये के पर्चे पर मरीजों को मुफ्त इलाज मुहैया कराया जाता था। वहीं लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया के मानकों को पूरा करने के लिए लोहिया अस्पताल का विलय कर दिया गया।

100 रुपये में होगा पंजीकरण

इलाज तो दूर की बात है, पहले पंजीकरण के लिए चार्ज में बढ़ोत्तरी देखी गई है। जहां मरीजों से पहले इलाज के लिए पंजीकरण प्रक्रिया करवाई जाती थी। इसके लिए लोहिया संस्थान में ₹1 लिए जाते थे। फिर इसी पर्चे की मदद से मरीजों का इलाज होता था, लेकिन आने वाले सितंबर महीने से यह प्रक्रिया खत्म हो जाएगी। अब अस्पताल में पंजीकरण के लिए ₹100 का पर्चा बनेगा। पहले आपको ₹100 का भुगतान करना होगा, फिर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।

अखिलेश यादव ने का इस कोरोना काल में व्यवस्था बंद न हो

सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट कर लोहिया संस्थान में पर्चे के दामों की बढ़ोतरी का विरोध किया। उन्होंने कहा कि ‘सपा की माँग है कि भाजपा सरकार लोहिया संस्थान में 1 रुपये के पर्चे पर इलाज-दवाई की व्यवस्था बंद न करे, बल्कि जनहित में जारी रखे। कोरोनाकाल में तो ये और भी ज़रूरी है कि ग़रीब को मुफ़्त या सबसे सस्ता इलाज व दवाई मिले।’ उन्होंने कहा कि ‘इलाज-दवाई की बुनियादी ज़रूरत के लिए सरकार का पीछे हटना निंदनीय है।’

लोहिया अस्पताल का डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में विलय होने के बाद दो साल तक एक रुपये के पर्चे की सुविधा, निःशुल्क जांच व दवाएं मिलनी थी। यह अवधि इसी माह समाप्त हो जाएगी।

बता दें कि 27 अगस्त, 2019 को विलय सम्बंधित शासनादेश जारी हुआ था। इसके अनुसार अगले दो साल तक अस्पताल में मिलने वाली सुविधा को चालू रखना था। जिसका समय अब पूरा होने वाला है।

आपको बता दें कि साल 1991 में स्थापित लोहिया संयुक्त अस्पताल में वर्ष 1998 में ओपीड़ी और 2000 में इंडोर सुविधा शुरू की गई थी। जिसके बाद अस्पताल के बगल में ही साल 2006 में लोहिया संस्थान की स्थापना की गई थी।

जहां वर्ष 2009 में पीजीआई की मदद से 20 बेड़ का अस्पताल शुरू किया गया था। इसके बाद 2017-18 में यहां एमबीबीएस कोर्स की शुरुआत हुई थी। इसके बाद ही अस्पताल और संस्थान के विलय की रूपरेखा बनाई गई थी।

Share.

Comments are closed.