सोशल मीडिया पर इन दिनों BSA ललितपुर द्वारा जारी एक पत्र प्राथमिक शिक्षकों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। जिसमे कहा गया है वे अभी संगठन एवं समिति जो शासन द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है उनके लेटर पैड अधिकृत नहीं माने जाएंगे । इतना ही नहीं BSA साहब ने चेतवानी भी दिया कि भविष्य में अगर ऐसा हुआ तो उन लोगो के खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी।

कुल मिलकर BSA द्वारा फरमान का निष्कर्ष यह निकलता है कि अगर शिक्षक BSA से कुछ कहना चाहे तो कोई ऐसा लेटर पैड/एप्लीकेशन लाये जो संस्था/संगठन प्रशासन द्वारा पंजीकृत हो। इस हिसाब से देखा जाये तो प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों की प्रवंध समितियों का तो सोसाईटी एवं चिट्स द्वारा रजिस्टेशन भी नहीं है ऐसे तो सभी स्कूल अवैध घोषित कर दिए जायेंगे ? इसकी चर्चा हर तरफ है।

क्या कहता है संविधान ?

भारत के सभी नागरिकों को अनुच्छेद 19 के अंतर्गत स्वतंत्रता के वे सभी अधिकार दे दिए गए हैं जिन अधिकारों के लिए भारत की जनता द्वारा एक लंबे समय तक संघर्ष किया गया है।

इनमें 6 मूलभूत स्वतंत्रताओं का प्रमुख स्थान है, वह मूलभूत स्वतंत्रता निम्न है-
1)- वाक्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता।
2)- शांतिपूर्वक सम्मेलन करने की स्वतंत्रता।
3)- संगम या संघ बनाने की स्वतंत्रता।
4)- भारत के राज्य में सर्वत्र अबाध संचरण की स्वतंत्रता।
5)- भारत के राज्य क्षेत्र के किसी भाग में निवास करने और बस जाने की स्वतंत्रता।
6)- कोई भी वृत्ति, उपजीविका, व्यापार या कारोबार करने की स्वतंत्रता।

संघ बनाने की स्वतंत्रता अनुच्छेद-19 (1) (ग)

भारत के संविधान का अनुच्छेद 19 (1) भारत के समस्त नागरिकों को संस्थाएं संघ बनाने की स्वतंत्रता प्रदान करता है पर स्वतंत्रता पर भी इस अनुच्छेद के खंड 4 के अंतर्गत राज्य को इस अधिकार पर लोक व्यवस्था या नैतिकता के हित में युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाने की शक्ति भी प्रदान है।

संघ या संस्था बनाने के अधिकार में संगठन या प्रबंध का अधिकार भी निहित है, यह स्थाई संस्था होती है इस प्रकार की संस्था और उनके सदस्यों का उद्देश भी सामान्य होता है।

इस प्रकार इसमें कंपनी सोसाइटी साझेदारी श्रमिक संघ और राजनीतिक दल आदि बनाने का अधिकार भी सम्मिलित है। इसमें केवल संघ या संस्था बनाने का ही नहीं बल्कि उसे चालू रखने का भी अधिकार है। संक्षेप में इस अधिकार में संघ बनाने या न बनाने उसे चालू रखने के रखने या उसमें शामिल होने या न होने की पूर्ण स्वतंत्रता का अधिकार सम्मलित है।

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