भारत की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है कृषि हमारे आर्थिक सामाजिक एवं आध्यात्मिक उन्नति का माध्यम रही है भारत के लोग कृषि को एक उत्स्व के रूप में मानते रहे है।

यह प्रकति एवं पर्यावरण की रक्षा के दायित्व का निर्वहन करते है जिसमे वृक्ष नदी पहाड़ पशुधन जीव जन्तु की रक्षा की जिम्मेदारी निभाना जीवन के महत्व पूर्ण आध्यात्मिक कार्य का हिस्सा रहा है।

वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार 54.6 प्रतिशत आवादी कृषि और उससे सम्बंधित कार्यों में लगी हुई है वर्तमान कीमतों के अनुसार वर्ष 1950 से 1951भारत की जडीपी में कृषि योगदान 51.18 प्रतिशत रहा है सी एस ओ के अनुसार वर्ष 2016-17 में कृषि और सबधित क्षेत्र का योगदान गिर कर 74.4 प्रतिशत रह गया।

किसान कौन है
आज तक हम यह निर्णय नहीं कार्य पाए की किसान की परिभाषा सही मायने में क्या है किसे किसान कहाँ जाए जिनकी अपनी ज़मीन होती है या जो हल चलाते है वह भूमि पर स्वं काम करता है वे खेती से अदिकाश आय प्राप्त करता है।

मध्यम किसान पट्टे की अथवा निजी भूमि रखता है उस पर स्वम् या उसके परिवार तथा श्रमिक खेती करते है देश में 90 प्रतिशत से अधिक किसान छोटे या सीमान्त किसान है जिनके खेतो की जोत 5 एकड़ से भी कम है।

अंत में…….
कृषि क्षेत्र में गिरावट के वावजूद इसका भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान वैशीक औसत 6.1 प्रतिशत से अधिक है विश्व में कृषि योग्य भूमि के मामले में भारत 15.74 करोड़ हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि होने के कारण दूसरा स्थान है।

दुनिया में मात्र 15 जलवायु क्षेत्र है जब की भारत में 20 कृषि जलवायु क्षेत्र है भारत दुनिया के अग्रणी 15 कृषि उत्पादक नियमित देशो में शामिल है यह सब भारतीय कृषि और किसान को गर्व अनुभव के लिए पर्याप्त है लेकिन इतना होते हुए भी किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है।

किसानो की आमदनी को दो गुना करने का ध्यान रखते हुए भारतीय किसान और भारतीय कृषि की दशा की सुधारने और इसे नई दिशा देने के लिए सरकार सकल्प है केंद्र सरकार ने वर्ष 2017-18 के बजट में ग्रामीण कृषि और उससे जुड़े उद्योगो के लिए आवंटन 24 प्रतिशत बड़ा कर एक लाख 87 हजार 223 करोड़ रुपये कर दिया था।

वर्ष 2022 तक किसानो था कृषि क्षेत्र में जुड़े लोगों की आमदनी दो गुनी करने के लिए अनेक योजनाए बनाई है इनके माध्यम से किसानो की दशा में सुधार लाकर उन्हे नई दिशा दी जा सकती है लेकिन इसके लिए आवश्यक है की सही नीति बनाई जाए और सही नियत से उसे कार्यनवत किया जाए।

( लेख अजय कुमार शोधार्थी )

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