तमिलनाडु शैक्षणिक वर्ष 2016-17 से 2020-21 के अध्यन के बाद एक रिपोर्ट सामने आयी है कि तकनीकी शिक्षा निदेशालय के अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कॉलेजों में में SC/ST इंजीनियरिंग छात्रों के दाखिले में 50% की कमी दर्ज हुयी है।

जिसके लिए मुख्या कारण अगस्त 2017 से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों के लिए केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं में से एक, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के कार्यान्वयन में “कुछ मानदंडों को बदलाव है ” यह योजना 10वीं कक्षा के बाद किसी भी पाठ्यक्रम को करने वाले छात्रों को कवर करती है, लेकिन यह अन्य पाठ्यक्रमों की तुलना में इंजीनियरिंग और चिकित्सा जैसे व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के अधिक छात्रों को आकर्षित करती है।

2012-17 के दौरान, राज्य ने स्व-वित्तपोषित महाविद्यालयों के लिए शुल्क निर्धारण समिति द्वारा निर्धारित ट्यूशन फीस की पूर्ण प्रतिपूर्ति की अनुमति दी। इस अवधि के दौरान, योजना के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के छात्रों की काफी भारी वृद्धि हुई।

उदाहरण के लिए, 2011-12 में लाभार्थी छात्रों की संख्या 45,315 थी। लेकिन पांच साल बाद 1,23,199 छात्रों की संख्या जो लगभग 270% बढ़ गयीं। इसके साथ ही राज्य ने यह भी शिकायत की थी कि केंद्र ने छात्रवृत्ति राशि के अपने हिस्से का पूरी तरह से भुगतान नहीं किया है , और छात्रवृत्ति के भुगतान में देरी होने के रिणाम स्वरुप वे छात्र जो गरीब और मज़दूर समाज से आते है जिनके पास आर्थिक व्यस्वथा नहीं है उनके अभिवावक या तो कर्ज लेने में मजबूर हो जाते है या पढाई छोड़ने को मजबूर होना पड़ता है। जिसके कारण दाखिले में लगातार छात्रों की कमी होती गई।

इसके लिए जरूरी है निजी कॉलेजों को भी राज्य सरकार से संपर्क करना चाहिए, बजाय इसके कि छात्रों को दर-दर भटकना पड़े। जिसके चलते छात्रों को बराबरी की शिक्षा प्राप्त हो सके और उन्हें पैसों के कारण पढाई न छोड़ना पड़े।

इस वर्ष मार्च में केंद्र सरकार द्वारा दिशा-निर्देशों के संशोधन का उल्लेख करते हुए, जिसके तहत केंद्र और राज्य सरकारें छात्रवृत्ति योजना की लागत को 60:40 के आधार पर साझा करेंगी। सामाजिक कार्यकर्ता जी. चंद्रमोहन को लगता है कि यह बोझ के रूप में है राज्य सरकारें अब पहले की तुलना में कम होंगी।

तमिलनाडु सरकार पिछले शासन द्वारा निर्धारित “कड़े मानदंडों” को दूर कर सकती है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को संबोधित एक याचिका में, उन्होंने और श्री भरत ने मांग की है कि छात्रवृत्ति योजना के तहत 2,000 करोड़ खर्च किए जाएं, जिनमें से 60% केंद्र द्वारा प्रदान किया जाएगा।

लेकिन देखना यह है कि केंद्र व राज्य सरकारें SC /ST छात्रों की शिक्षा के लिए कितना कुछ करती है ?

Share.

Comments are closed.