देश चलाने के लिए जनता जनार्दन ने हम नेताओं को चुनकर भेजा है तो हम अपने हिसाब से देश चलाएंगे, सरकार चलाएंगे,और जनता को भी चलनै के लिए आदेशित,निर्देशित करेंगे।अभी अभी देश में बढ़ते क़ोरोना मामलों के संदर्भ में देश के न्यायालयों ने स्वत संज्ञान लेना शुरु कर दिया है,यह बहुत ही गलत बात है।

यह तो अनावश्यक हस्तक्षेप है न्यायालयों का सरकार पर हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए । माना कि नेताजी की लापरवाही से देश में कोरोना के मामले बहुत बढ़ गये क्योकि हमने पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव घोषित कर दिए और अनाप शनाप रैलियां आयोजित किया तथा लाखों लोगों को एकत्रित होने दिया यह एक बड़ा काम कर दिया।

हम नेताओं को भी अपना रुतबा,ताकत और औकात ,हनक दिखाने का मौका मिला तो हम क्यों पीछे ‌ हटते। आखिर चुनाव आयोग क्या घास खोद रहा था। उसने कोरोना के बारे में क्यों नहीं सोचा? आखिरकार न्यायालय ने उस पर मृत्यु कारित करने जैसा आरोप लगा दिया कि नहीं,आखिरकार चुनाव आयोग संज्ञान लेकर चुनाव में भीड़ और रैली पर प्रतिबंध लगाकर सोशल मीडिया पर प्रचार के आदेश भी तो दे सकता था।

हमने तो लोगों का इहलोक वह परलोक सुधारने के लिए कुंभ का मेला भी इसी बीच एक वर्ष 12वें के बजाय 11वें वर्ष में आयोजित करवा दिया ताकि अगले वर्ष शांतिपूर्वक यूं,पी के चुनाव करवा सकें।

कई विद्वान, संतों एवं महामंडलेश्वर की कोरोना से मृत्यु के लिए आरोपित किया गया ।हमने लगे हाथ यूंपी, के पंचायत चुनाव करवा लिए तो भी लोगों ने नाक भौं सिकोडां कि इससे भी कोरोना पीड़ितों , की संख्या उनकी मृत्यु दर बढ़ी तथा कोरोना से लड़ने में लापरवाही के कारण चिकित्सीय मूलभूत सुविधाओं में सरकार को असफलता प्राप्त हुई।

खैर हमारा तो मानना है कि कोरोना को तो आना ही था सो वह आया और जिन लोगों की मृत्यु उससे होनी थी वह हुई। यह तो विधना का ही लेख था होता ही होता। लोग बेवजह सरकार या नेताओं या अधिकारियों को दोषारोपित कर रहै हैं। कोरोना तो एक निमित्त मात्र था लोगों की मृत्यु का कारण बना। हम लाख कोशिशें करते न बचा पाते।

लोग कहते हैं कि अस्पतालों में दवाईयां नहीं है ,बेड नहीं है, आक्सीजन नहीं है,इस कारण मरीज अस्पतालो के अंदर ,बाहर, सड़को पर तड़प- तड़प कर मर गये।इसमें नेताओं की क्या गलती है।यह सब ईश्वर की कृपा है। जिनकी मौत लिखी थी। वे अस्पताल आकर भी मर गये, जिन्हें बचना था वे घर में भी बच गये, लेकिन इस नश्वर जगत में किसी के मरने जीने पर विलाप करना उचित नहीं है।

हमने तो इसीलिए यह घोषणा कर दी है कि जो व्यक्ति अस्पतालों में दवाईयों,बेड, आक्सीजन नहीं होने की खबर फैलाएगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करके उसे जेल में बंद कर दिया जाएगा। तथा उसके खिलाफ रासुका या गंभीर चिकित्सीय धारा में आरोपित करके देशद्रोह का मुकदमा चलाया जाएगा।

इधर देखने सुनने में यह भी आया है कि लोग सही खबरैं फैलाकर भोली भाली जनता को बरगलाने की कोशिश करते हैं। यह ग़लत है‌।सच तो यह है कि सरकार जैसे चाहे सिर्फ वही खबर जनता तक जानी चाहिए। देश की सही गलत खबर बाहर जाने से देश की बदनामी होती हैं। कोरोना से संबंधित खबरें मसलन भारत में दवाईयों, बेड, आक्सीजन,की कमी की खबरों से आज दुनिया भर के अखबार भरे पड़े हैं,ऐसे में सरकार विरोधी मीडिया और छुटभैये नेताओं को सजा देना बहुत जरूरी हो गया है।

हमारी अदालतें हमारी कमियों कै विरुद्ध स्वत संज्ञान लेने का अवांछनीय काम करने लगीं हैं। हमारी कृपा से चलने वाली संस्थाएं हमें रास्ता दिखा रहीं हैं। हमारी मंशा है कि संविधान , लोकतंत्र और जनसेवा के नाम पर कोई हमें बदनाम न करें।अ

गर हम अदालतों के आदेश का अनुपालन न कराएं तो वे क्या कर सकतीं है। अगर वे हमारेअनुसार कार्य करें तो हम उन्है एन केन प्रकारेण अपनी जमात में शामिल कर ,सकते हैं। हमारी जुबान ही संविधान और हमारी कार्यप्रणाली ही लोकतंत्र है। इसलिए हमारी दृष्टि से अदालतों को यह बात ध्यान में रखते हुए सरकार के विरुद्ध टिप्पणी करने से बचना चाहिए।

इसलिए हम संक्षेप में संविधान के समर्थकौं,लोकतंत्र के स्तंभों तथा मीडिया और न्यायपालिका को‌ आगाह करना चाहते हैं कि वे सरकार के कार्यो में को ई हस्तक्षेप न करें तथा जनता और देश दुनिया के सामने देश की यथास्थिति दर्शाने की कोशिश न करें, अन्यथा हम उन् पर राष्ट्रद्रोह का अघोषित अस्त्र चलाकर किंकर्तव्यविमूढ़ कर सकते हैं।

हम अपने देश की जनता से भी अपील करना चाहेंगे कि वह किसी के बहकावे में न आएं तथा हमें अपना कर्म निर्विरोध करने दें।इसी में हम सबकी भलाई है।

राम सनेहीविनय (लेखक एक स्वतंत्र पत्रकार है यह लेख वर्तमान वास्तविकता पर आधारित है किसी को ठेंस पहुँचाने का कोई उद्देश्य नहीं है )

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