हाथरस कांड में कानून की नाकामी और राजनीतिक बेशर्मी की सारी हदें पार हो रहे हैं जहां एक तरफ पीड़िता के इंसाफ के लिए लोग सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहें है. वंही सरकार और राजनीतिक पीआर एजेंसियां मिलकर पूरे घटना को उल्टा कर देने में लगीहै।

एक तरफ़ सवर्ण परिषद् आरोपियों को बचाने के लिए दिन-रात पंचायतें बुला रहा है और रैलियां निकालने की बात कर रहा है। जबकि दूसरी तरफ पीआर एजेंसियों को फंडिंग करके पूरे केस को उल्टा कर देने की कवायद मीडिया ने शुरू कर दी है।

हाल ही में मीडिया ने एक वीडियो वायरल किया और जिसमें दावा किया गया कि हाथरस काण्ड में नक्सली महिला का कनेक्शन है जो पीड़िता के परिवार में नकली भाभी बनकर रहती थी।

हालाँकि अब इस महिला की भी सच्चाई सामने आ गई है। महिला का नाम राजकुमारी बंसल है जो जबलपुर मेडिकल कॉलेज में सहायक प्रोफेसर हैं। राजकुमारी बंसल ने बताया की हाथरस की घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया था एक फोरेंसिक एक्सपर्ट होने के नाते वे हाथरस गई थी ताकि वे पीड़िता को न्याय दिला सके और फोरेंसिक रिपोर्ट को सही से जान सके।

राजकुमारी बंसल ने योगी सरकार की जांच पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं उनका दावा है कि फॉरेंसिक एक्सपर्ट होने के नाते पीड़िता के इलाज से संबंधित दस्तावेज जांच करना चाहती थी लेकिन उन्हें दस्तावेज देखने को नहीं मिला।

साथ ही सरकार द्वारा प्रायोजित टीआरपी के लिए पीआर एजेंसियों के इशारे पर काम करने वाली मीडिया ने उन्हें नकली भाभी सहित नक्सल से संपर्क रखने तक के इल्जाम लगा दिया।

उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोप को सिरे से खारिज करते हुए चुनौती दी है कि यदि उनके संबंधों नक्सलियों से है तो जांच एजेंसी उन्हें साबित करें नहीं तो वे मीडिया और उत्तर प्रदेश सरकार पर मानहानि है दावा करेंगी।

राजकुमारी बंसल ने खुद फ़ोन टाइपिंग होने का भी आरोप लगाते हुए बकायदा जबलपुर के साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा हाथरस की घटना ने उन्हें अंदर तक झकझोर दिया है पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए वे इस लड़ाई में पीड़ित परिवार के साथ है।

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