बिहार विधानसभा चुनाव में विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवारों के नामों की घोषणा रहे है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू ने अपने कोटे की 115 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की है। नीतीश कुमार ने पूर्व मंत्री मंजू वर्मा को भी मैदान में उतारा है।

बता दे कि मंजू वर्मा 2018 मुज़फ़्फ़रपुर बालिका गृह घोटाले की एक आरोपी हैं और उन्हें पार्टी ने निकाल दिया था। चौंकाने वाली बात यह है कि वीआरएस के साथ जेडीयू की सदस्यता लेने वाले पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे को टिकट नहीं मिला है।

जेडीयू ने जिन महिलाओं को मैदान में उतारा है, उनमें एक नाम ऐसा है जिसे देखकर हर कोई हैरान है। नीतीश की सरकार में सामाजिक न्याय मंत्री रहीं मंजू वर्मा को भी टिकट दिया गया है। मुजफ्फरपुर की बालिका कांड में नाम आने के बाद उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इस मामले में, 34 लड़कियों के साथ बलात्कार की पुष्टि की गई थी।

इस घोटाले को लेकर इतना विवाद हुआ कि जदयू ने उन्हें पार्टी से निलंबित भी कर दिया। जेडीयू मंजू वर्मा को लेकर विपक्षी दलों से घिरी हुई थी, लेकिन मंजू वर्मा फिर से टिकट पाने में कामयाब रहीं।

बता दें कि मंजू वर्मा इस समय जमानत पर बाहर हैं। उन्हें चेरिया विधानसभा क्षेत्र से पार्टी ने मैदान में उतारा है। मंजू वर्मा को टिकट देने के फैसले को भी एक आश्चर्य माना जाता है क्योंकि वह मुजफ्फरपुर गर्ल्स होम स्कैंडल के समय समाज कल्याण विभाग की मंत्री थीं। विपक्ष ने आरोप लगाया कि बालिका कांड उसकी नाक के नीचे हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस मामले में मंजू वर्मा के पति चंद्रशेखर वर्मा का नाम भी सामने आया था। उनके पति पर आरोपी बृजेश ठाकुर से संपर्क रखने और अवैध हथियार प्राप्त करने के लिए भी मुकदमा चलाया गया था।

जेडीयू सूची में पूर्व डीजीपी गुप्तेश्वर पांडे की अनुपस्थिति भी आश्चर्यजनक है। गुप्तेश्वर पांडे डीजीपी के पद से वीआरएस लेने के बाद जेडीयू में शामिल हो गए थे और राजनीतिक हलकों में इस बात की जोरदार चर्चा थी कि वह जेडीयू के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे लेकिन उनका नाम सूची से गायब है।

Share.

Comments are closed.