16 दिसंबर 2012 की रात चलती बस में एक छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार की घटना की जानकारी मीडिया को मिलते ही तो सभी समाचार चैनल और अख़बार उस छात्रा को न्याय दिलाने के लिए सड़क पर उतर आये। देखते ही देखते शाम तक अगले दिन जेएनयू से लेकर दिल्ली विवि सहित देश के कोने-कोने में स्कूल के छात्र छात्राएं कैंडल मार्च लेकर सड़को पर थे।

यह पहली बार था जब एक लड़की को इंसाफ दिलाने के लिए पूरा देश सड़को पर उतर आया हो। शायद होना भी चाहिए समाज में ऐसे कुकर्मीयों को जगह नहीं होनी चाहिए उन्हें फांसी या उससे भी कड़ी सजा मिलनी चाहिए।

पर सवाल इस बात का है कि क्या भारत की जनता जाति देखकर सहानुभूति प्रकट करती है।

उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक वाल्मीकि समाज की लड़की से सामूहिक बलात्कार किया जाता है इतना ही नहीं निर्भया जैसी बर्बरता का अंजाम भी दिया गया।

लड़की की जुबान काट दी गई और उसके रीड की हड्डियां तक तोड़ दी गई। 14 सितंबर को घटी इस घटना को कल यानी 28 सितंबर को एयर एंबुलेंस से इलाज के लिए दिल्ली ले जाया गया था। जहां सफदरगंज असपताल में उसकी मौत हो गई।

इस घटना को लेकर लोग सोशल मीडिया पर गुस्सा प्रकट कर रहे हैं। लोगों के निशाने पर गोदी मीडिया है। 2012 में वह मीडिया जो निर्भया को न्याय दिलाने के लिए गाला फाड़ रही थी आज वह एकदम खामोश है। जिसकी नजरों से आम लोगों के साथ ऐसी नृशंस घटनाओं की खबरें ओझल लगने लगी हैं और वे कंगना, सुशांत, रिया, दीपिका जैसी सेलिब्रिटी में लोगों को उलझाए रखा है।

निर्भया को न्याय दिलाने वाले लोग जो सड़कों पर कैंडल मार्च के लिए उतर आए थे आज कोई भी नजर नहीं आ रहा। ऐसे में कई सोशल मीडिया पर लोगो ने यह तक कहा है कि नए भारत में जाति देखकर लोग संवेदना व्यक्त करते है।

आगरा के ndian Legal and Social Organization ने लोग जिलाधिकारी हाथरस से मिले और पीड़िता के दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की बात कही है।

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