जब पूरी दुनिया कोरोना वायरस से लड़ रही है तो भारत में दलित अपने अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं आए दिन दलितों पर उत्पीड़न की खबरें मीडिया में सुर्खियों में रहती हैं। ताजा मामला मध्यप्रदेश के इंदौर का है।

जहां एक दलित महिला (Dalit Women) के शव का अंतिम संस्कार पर विवाद इसलिए खड़ा हो गया क्योंकि गांव के दबंग लोग ऐसा नहीं चाहते थे। इसके बाद दलित समुदाय के लोगों ने शव रखकर धरना देना शुरू कर दिया फिर प्रशासन के आने के बाद मामला शांत हुआ और सरकारी जमीन पर महिला के शव का दाह संस्कार किया गया। आपको बता दें कि मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार है।

दलितों पर अत्याचार, पिछले 10 सालों में 20 फीसदी से ज्यादा बढ़ा

नेशनल दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस (National Dalit Movement for Justice) की एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 10 सालों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति पर अत्याचार के मामले 20 फीसदी से ज्यादा बढ़े हैं।

इसमें मर्डर, हत्या की कोशिश, पुलिस द्वारा मारपीट, शारीरिक शोषण आदि के मामले शामिल थे। ये केस उत्तराखंड, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और महाराष्ट्र से सामने आए।

आखिर क्या है मामला?

मामला मध्यप्रदेश के इंदौर के देपालपुर विधानसभा क्षेत्र के चटवाड़ा गांव का है जहां कमला बाई नामक एक दलित महिला की मृत्यु हो गई उसके बाद शव का अंतिम संस्कार करने के लिए लोग श्मशान घाट की ओर चलने लगे लेकिन रास्ते में ही दबंगों ने दलितों को अंतिम संस्कार करने से रोक दिया।

दिन भर चले विवाद के बाद आखिर में प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। जिस महिला के शव को लेकर विवाद उपजा वो महिला बलाई समाज की थी और गांव में कलोता समाज के लोगों का वर्चस्व है जो खुद भी पिछड़ी जाति में शामिल हैं।

देपालपुर के चटवाड़ा गांव में एक दलित महिला के शव को अंतिम संस्कार के लिए लोग शमशान घाट पर ले गए लेकिन दबंगों ने दलितों को ऐसा करने से रोक दिया, महिला बलाई समाज की थी और गांव में कलोता समाज के लोगों का वर्चस्व है जो खुद भी पिछड़ी जाति में शामिल हैं।

कांग्रेस ने सीएम शिवराज पर साधा निशाना

‘पूरे समाज और विशेष कर मध्यप्रदेश के लिए यह शर्म की बात है कि आज भी समाज में छुआ छूत है। ज़िंदा के साथ भी और मरने के बाद भी!! मध्यप्रदेश सरकार अभी भी मौन। तत्काल करवाई होना चाहिए।’

कांग्रेस नेता और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह


वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस सेवा दल ने अपने आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से ट्वीट कर कहा, ‘जाति है जो मरने के बाद भी नहीं जाती। इंदौर में एक दलित की मृत्यु के बाद उसका दाह संस्कार सिर्फ उसकी जाति की वजह से रोक दिया गया। दलित समाज एक ओर 7 घण्टे तक धरने पर बैठा रहा, वहीं प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। मध्यप्रदेश फिर शर्मसार।

हर जाति के अलग अलग शमशान

बता दें कि चटवाड़ा गांव में हर वर्ग के लिए अलग-अलग श्मशान घाट बनाए गए हैं लेकिन जहां दलितों का श्मशान घाट है वहां बड़ा नाला होने के कारण बारिश में जल-जमाव हो जाता है। इसी वजह से कमला का शव वहां नहीं जलाया जा सकता था।

चटवाड़ा में हर वर्ग के लिए चार अलग-अलग शमशान बने हुए हैं और दलितों का जहां शमशान हैं उसके पास बड़ा नाला है और बारिश के दौरान वहां हालात बदतर हो चले हैं, बाद में प्रशासन ने चटवाड़ा गांव मुख्य मार्ग पर ग्राम कोटवार की सेवा भूमि पर देर शाम शेड तैयार करवाया और शव का अंतिम संस्कार कर मामले को शांत किया।

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