दलितों के खिलाफ अत्याचार से जुड़ी एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें पता चला है कि पिछले 10 सालों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति पर अत्याचार के मामले 20 फीसदी से ज्यादा बढ़े हैं।

इतना ही नहीं इनपर होनेवाला अत्याचार कोरोना काल में भी कम नहीं हुआ। इसपर रिपोर्ट नेशनल दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस (National Dalit Movement for Justice) ने दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, छुआछूत, मारपीट, सामूहिक हिंसा और लैंगिक भेदभाव के मामले कोरोना काल में भी सामने आए हैं। रिपोर्ट कहती है कि अप्रैल से जून के बीच दलितों पर अत्याचार के 100 से ज्यादा मामले सामने आए।

इसमें मर्डर, हत्या की कोशिश, पुलिस द्वारा मारपीट, शारीरिक शोषण आदि के मामले शामिल थे. ये केस उत्तराखंड, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब और महाराष्ट्र से सामने आए.

10 सालों में कितने बढ़े मामले

नेशनल दलित मूवमेंट फॉर जस्टिस की यह रिपोर्ट के अनुसार अनुसूचित जाति के खिलाफ अत्याचार के मामले 2018 में 2009 के मुकाबले 27.3 फीसदी बढ़ गए। अनुसूचित जनजाति के खिलाफ अत्याचार पिछले 10 सालो में 20.3 फीसदी बढ़ा है। रिपोर्ट कहती है कि 10 राज्यों के 40 प्रतिशत जिलों में दलितों पर अत्याचार के चांस बहुत ज्यादा हैं।

इससे पहले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (National Crime Records Bureau) ने भी दलितों और अल्पसंख्यकों पर एक रिपोर्ट दी थी।

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की इस रिपोर्ट में जाति, धर्म जैसे अलग-अलग आधार पर देश की जेलों में बंद कैदियों से जुड़े आंकड़े पेश किए गए थे।

इन आंकड़ों से पता चला था कि जेलों में बंद दलितों,आदिवासियों और मुसलमानों की संख्या उनकी आबादी के अनुपात से ज्यादा है।

Share.

1 Comment

  1. Pingback: The Netizen News/ Netizen News