साल 2000 के बाद से गरीब औऱ कम आय वाले देशों में गाड़ियों की संख्या में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है और इस कारण लेड एसिट बैटरी के इस्तेमाल और इनकी रीसाइक्लिंग में भी प्रगति देखने को मिली है। इनकी री-साइक्लिंग कई बार असुरक्षित तरीके से की जाती है। एक कारण यह भी हो सकता है की दुनिया में लेड पॉइज़निंग के मामले बढ़ते जा रहे है।

यूनिसेफ़ और प्योरअर्थ नाम के एक संगठन द्वारा तैयार की गई इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में हर तीन बच्चे में से एक लेड पॉइज़निंग का शिकार है जिसके कारण उसकी सेहत को गंभीर नुक़सान पहुंच सकता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि विश्व में 80 करोड़ बच्चे लेड पॉइज़निंग से प्रभावित हैं और इनमें से अधिकांश गरीब और कम आय वाल देशों में हैं।

यूनिसेफ़ की रिपोर्ट के अनुसार भारत के 27.5 करोड़ बच्चों के ख़ून में सीसा की मात्रा पांच माइक्रोग्राम प्रति डेसीलिटर तक है। लेड पॉइज़निंग का असर बच्चों के मस्तिष्क, उनके दिमाग़, दिन, फेफड़ों और गुर्दे पर होता है। इस बीमारी का खतरा अजन्मे बच्चों और 5 साल से कम उम्र के बच्चों को अधिक जोखिम हो सकता है।

इतनी बड़ी संख्या का आधा हिस्सा अकेले दक्षिण एशिया में हैं जबकि भारत में सीसा से 27.5 करोड़ बच्चे प्रभावित हैं।

भारत के बाद जो देश बच्चों में लेड पॉइज़निंग से सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं वो हैं, अफ्रीका और नाइजीरिया। वहीं इस सूची में तीसरे और चौथे स्थान पर पाकिस्तान और बांग्लादेश का नाम है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “लेड एक शक्तिशाली न्यूरोटॉक्सिन है यानी दिमाग़ की नसों को पर असर करने वाला ज़हर है। कम एक्सपोज़र के मामलों में बच्चों में बुद्धिमत्ता की कमी यानी कम आईक्यू स्कोर, कम ध्यान देना और जीवन में आगे चल कर हिंसक व्यवहार और यहां तक ​​कि आपराधिक व्यवहार का कारण भी बन सकता है।

भारत के बाद जो देश बच्चों में लेड पॉइज़निंग से सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं वो हैं, अफ्रीका और नाइजीरिया। वहीं इस सूची में तीसरे और चौथे स्थान पर पाकिस्तान और बांग्लादेश का नाम है।

लेड पॉइज़निंग के लक्षण

  1. अनिद्रा
  2. सिरदर्द
  3. पेट में दर्द
  4. स्मरण शक्ति की क्षति
  5. पुरुष प्रजनन की समस्याएं
  6. भूख में कमी
  7. अस्वस्थता और थकान

लेड पॉइज़निंग के कारण

  1. बैक्टीरिया के संपर्क में आना– फूड पॉइजनिंग का प्रमुख कारण बैक्टीरिया के संपर्क में आना है। हालांकि, इसका इलाज एंटीबायोटिक दवाइयों के खाने से संभव है, लेकिन फिर भी हम सभी को अपनी सेहत का विशेष ध्यान देना चाहिए।
  2. खराब भोजन करना- ऐसा माना जाता है कि हमारे खान-पान का हमारी सेहत पर काफी असर पड़ता है।
    यह बात फूड पॉइजनिंग पर भी लागू होती है क्योंकि इसके होने का मुख्य कारण खराब भोजन करना भी है।
  3. पेट संबंधी दिक्कत होना- यदि किसी व्यक्ति को पेट संबंधी कोई दिक्कत जैसे कब्ज, गैस इत्यादि हैं, तो उसे फूड पॉइजनिंग होने की संभावना काफी ज्यादा रहती है।
  4. कमजोर रोग-प्रतिरोधक क्षमता का होना- फूड पॉइजनिंग होने की संभावना उस व्यक्ति में काफी ज्यादा रहती है, जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता (immunity power) कमजोर होती है।
  5. जेनेटिक कारण होना- ऐसी बहुत सारी बीमारियाँ हैं, जिनके होने का कारण जेनेटिक होता है।
    इनमें फूड पॉइजनिंग भी शामिल है इसलिए यदि किसी व्यक्ति के परिवार में फूड पॉइजनिंग की बीमारी रहती है, तो उसे अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

रिपोर्ट के सह-प्रकाशक प्योरअर्थ की प्रोमिला शर्मा कहती हैं। हमने पूरे भारत में मौजूद 300 लीड-दूषित जगहों का आकलन किया है, इनमें से ज़्यादातर अनौपचारिक बैटरी रीसाइक्लिंग की जगहें हैं और अलग-अलग तरह के कारखानों वाले ओद्योगिक इलाक़े हैं।

लेड पॉइज़निंग का कारण एसिड बैटरी की अवैध रीसाइक्लिंग भी है। पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश में इस तरह के अनियमित लेट-एसिड बैटरी रीसाइक्लिंग का काम सबसे अधिक होता है।

भारत में लेड के संपर्क में आने की एक बड़ी वजह इन्वर्टर को भी बताया जाता है। लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में बायोकेमिस्ट्री विभाग के प्रमुख डॉक्टर अब्बास मेहदी कहते हैं कि उत्तर प्रदेश में हमने एक ऐसा ही मामला देखा जिसमें इन्वर्टर से लीक होने वाले लेड का बुरा असर बच्चे के स्वास्थ्य पर पड़ने लगा था।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक के कचरे और खनन के उत्पादों के अनियमित संचालन से भी लेड पॉइज़निंग का ख़तरा हो सकता है।

रिपोर्ट- सर्वजीत यादव

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