उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड के चित्रकूट की खदानों में नाबालिग लड़कियों के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया है। यहां गरीब नाबालिग लड़कियां मजदूरी करने को मजबूर हैं और बिचौलिए इसका फायदा उठाते हैं।

एक निजी चैनल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने पूछा है कि क्या यही सपनों का भारत है?

रिपोर्ट साझा करते हुए राहुल ने ट्वीट कर कहा, ‘अनियोजित लॉकडाउन में भूख से मरता परिवार… इन बच्चियों ने जिंदा रहने की ये भयावह कीमत चुकाई है।

क्या ये ही हमारे सपनों का भारत है?’ बता दें कि चित्रकूट की खदानों में 12-14 साल की लड़कियां परिवार का पेट पालने के लिए खदानों में काम करने जाती हैं। जहां दो- तीन सौ रुपये के लिए उनके जिस्म की बोली लगती है।

कोरोना संकट के दौर में चित्रकूट की खदानों में नाबालिग लड़कियों के साथ यौन शोषण का मामला सामने आया है. आज तक की खास रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है कि खदानों में नाबालिग लड़कियों के साथ यौन शोषण किया जाता है.

आज गरीबी में पलती जिंदगी सबसे बड़ा अभिशाप है। दो जून की रोटी के जुगाड़ के लिए हड्डियां गला देने वाली मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन बस इससे काम नहीं चलता। यहां रोटी के दो टुकड़े और चंद खनकते सिक्के फेंकने की एवज में दरिंदे करते हैं बेटियों के जिस्म का सौदा।

जहां गरीबों की नाबालिग बेटियां खदानों में काम करने के लिए मजबूर हैं, लेकिन ठेकेदार और बिचौलिये उन्हें काम की मजदूरी नहीं देते। मजदूरी पाने के लिए इन बेटियों को करना पड़ता है अपने जिस्म का सौदा।

ये लड़कियां कॉपी – कलम लेकर स्कूल जाने की उम्र में पेट पालने के लिए खदानों में काम करने जाती है गरीबी और बेबसी ने इनके बचपन को छीन लिया है।

परिवार को पालने का जिम्मा इनके कंधों पर आ चुका है। 12-14 साल की बेटियां खदानों में काम करने जाती हैं, जहां दो सौ तीन सौ रुपये के लिए उनके जिस्म की बोली लगती है।

कर्वी की रहने वाली सौम्या (बदला हुआ नाम) कहती है, ‘जाते हैं और काम पता करते हैं तो वो बोलते हैं कि अपना शरीर दो तभी काम पर लगाएंगे, हम मजबूरी में ऐसा करते हैं, फिर भी पैसे नहीं मिलता। मना करते हैं तो बोलते हैं कि काम पर नहीं लगाएंगे। मजबूरन हमें यह सब करना पड़ता है।

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