कोरोनोवायरस लोगों के फेफड़ों पर हमला करता है, कुछ मामलों में निमोनिया जैसे लक्षण होते है जिससे लोगो को साँस लेने में बहुत दिक्क्त होती है। ऐसी स्थिति में वेंटिलेटर, की सहायता से फेफड़ो तक हवा पहुंचे जाती है ताकि रोगियों को जीवित रखा जा सके।

हिंदुस्तान टाइम में छपी एक खबर के मुताबिक देश में अनुमानित 40,000 काम करने वाले वेंटिलेटर हैं, कई विशेषज्ञों ने कहा कि कोविद -19 संक्रमणों में वृद्धि होने की स्थिति में यह अपर्याप्त संख्या है।

देश में कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। अब तक 488 केस सामने आ चुके हैं। वहीं, इस महामारी से एक और मौत हो गई है, जिसके बाद देश में अब तक 10 लोगों की जान जा चुकी है।

अगर इसी तरह यह वायरस बढ़ता रहा तो हमारे सामने इटली और ईरान जैसे हालात होंगे यहाँ भी चिकित्सा संसाधन की कमी के आरोप लग रहे है। जहाँ मरीजों के गहन अध्यन के लिए वेंटिलेटर और ICU की जरूरत है। लेकिन इनकी संख्या अपर्याप्त है।

इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर के अध्यक्ष डॉ. ध्रुव चौधरी के अनुसार, देश भर में तैनात चिकित्सा उपकरणों की एक मोटी-मोटी संख्या बताती है कि सक्रिय वेंटिलेटर लगभग 40,000 हो सकते हैं।

इसके आलावा यह सुविधा अधिकतर सरकारी मेडिकल कॉलेजों, महानगरों, राज्य की राजधानियों और निजी अस्पतालों में ही है। जबकि ग्रामीण इलाके में मुश्किल से होगी।

हमें कोरोना वायरस का परीक्षण में तेजी लाने की आवश्यकता है ताकि संक्रमित की जल्दी से पहचान किया जा सके उन्हें गंभीर चरण में जाने से पहले ही इलाज करके रोका जा सकता है ।

दक्षिण कोरिया अब तक वह देश है जिसने इस वायरस का डट कर मुकाबला किया उसके पास पर्याप्त मात्रा में इक्विपमेंट थे। चीन के डेटा से पता चलता है कि लगभग 15% कोविद -19 रोगियों को अस्पताल में भर्ती कराने की आवश्यकता होती है। और 5% को आईसीयू में वेंटिलेटर की आवश्यकता होती है। अगर मरीज को समय से यह उपकरण नहीं मिलते है तो उसकी मौत तक हो जाती है।

इटली और ईरान में मृत्युदर में लगातार बढ़ोतरी के लिए लोग ICU और इन्ही उपकरणों की कमी के लिए जिम्मेदार बता रहे है। “किसी के पास पर्याप्त वेंटिलेटर नहीं हैं, कोई भी सामना करने में सक्षम नहीं है ।

मेदांता में महत्वपूर्ण देखभाल के अध्यक्ष डॉ. यतिन मेहता ने कहा कि अगर ऐसी स्थित आती है तो आईसीयू बेड खाली करने के लिए अस्पतालों में वैकल्पिक सर्जरी को रद्द करना भी पर्याप्त नहीं होगा।

भारत ने आईसीयू बेड को स्टैंडबाय पर रखने के लिए वेंटिलेटर के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। वैकल्पिक सर्जरी को रद्द कर दिया है और लोगों को सामाजिक रूप से अलग करने के लिए रविवार को जनता कर्फ्यू लगा दिया।

यही नहीं सरकार ने इस प्रकोप को रोकने के लिए सभी प्रकार की यात्रा पर प्रतिबन्ध लगा दिए है । सरकारी अधिकारियों के अनुसार देश में वेंटिलेटर के उत्पादन में तेजी लाने के लिए उद्योग के प्रस्ताव पर शनिवार को वैज्ञानिकों के एक शीर्ष पैनल ने मंजूरी दे दी,है।

औसतन, एक वेंटिलेटर की कीमत रु 8-10 लाख है। उद्योग के अनुमान के अनुसार, 2019 में सार्वजनिक और निजी अस्पतालों द्वारा लगभग 444.74 करोड़ के मूल्य के लगभग 8,510 वेंटिलेटर खरीदे गए।

कुछ अन्य विशेषज्ञों ने कहा कि वेंटिलेटर्स का उपयोग करने के लिए मेडिकल स्टाफ को प्रशिक्षित करना और उन्हें 24×7 चलाने के लिए पर्याप्त कुशल ऑपरेटर हैं। भारत में, प्रत्येक 1,457 लोगों के लिए एक डॉक्टर है – विश्व स्वास्थ्य संगठन की तुलना में कम 1: 1,000 अनुपात।

Share.

Comments are closed.