नई दिल्ली : राजनीति को अपराधियों के चंगुल से मुक्त कराने की दिशा में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम आदेश देते हुए राजनीतिक दलों से कहा कि वह चुनाव मैदान में उतरने वाले प्रत्याशियों का क्रिमिनल रेकॉर्ड को जनता के सामने रखे।

कोर्ट ने कहा कि वह प्रत्याशियों के आपराधिक रेकॉर्ड को साइट पर अपलोड करे। देश के सर्वोच्च न्यायालय ने साथ ही आगाह किया है कि इस आदेश का पालन नहीं किया गया, तो अवमानना की कार्रवाई की जा सकती है।

वर्तमान लोकसभा में बीजेपी के सबसे ज्यादा दागी सांसद :

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) की रिपोर्ट के मुताबिक 106 वर्तमान सांसदों के उपर हत्या, सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने, अपहरण, महिलओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं।

इनमें से सबसे अधिक मामले चाल, चरित्र और चेहरे की बात करने वाली पार्टी बीजेपी के सांसदों पर दर्ज है। बीजेपी ने सबसे ज्यादा दागी उम्मीदवारों पर भरोसा जताया है। बीजेपी के 267 में से 92 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

गंभीर मामले में तो आधे में बीजेपी और आधे में दूसरी सारी पार्टियां हैं। बीजेपी के 58 सांसद गंभीर आपराधिक मामलो में आरोपी हैं। जो कि कुल गंभीर मामलों में आधे से ज्यादा है। इस लिस्ट में दूसरे नंबर पर बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना है।

शिवसेना के 15 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें से आधे से ज्यादा पर तो गंभीर मामले में आरोपी हैं। शिवसेना के 8 सांसदों पर गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। तीसरे नंबर पर तृणमूल कांग्रेस है। तृणमूल के 7 सांसदों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें 4 गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी बनाए गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने राजनीतिक दलों से कहा कि वे अपने प्रत्याशियों के आपराधिक रेकॉर्ड को अखबारों, बेवसाइट्स और सोशल साइट्स पर प्रकाशित करे।

जस्टिस आरएफ नरीमन और एस रविंद्र भट की बेंच ने कहा कि राजनीतिक दलों को यह बताना होगा कि उन्होंने एक साफ छवि के उम्मीदवार की बजाय आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवार को क्यों टिकट दिया। कोर्ट ने ‘जिताऊ उम्मीदवार’ के तर्क को खारिज किया है।

इसके साथ ही पार्टियों से सवाल किया कि आखिर उनकी ऐसी क्या मजबूरी है कि वह आपराधिक पृष्ठभूमि के प्रत्याशियों को टिकट देती हैं। सियासी दलों को ऐसे उम्मीदवार को चुनने के 72 घंटे के भीतर चुनाव आयोग को अनुपालन रिपोर्ट देनी होगी जिसके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।

जिन उम्मीदवारों के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं उनके बारे में अगर राजनीतिक दल कोर्ट की व्यवस्था का पालन करने में असफल रहते हैं तो चुनाव आयोग इसे शीर्ष अदालत के संज्ञान में लाएगा।

अश्विनी उपाध्याय ने दागी नेताओं को टिकट दिए जाने के खिलाफ याचिका दायर करते हुए कहा कि राजनीति से अपराधियों को हटाने के लिए पिछले छह महीने में सरकार या चुनाव आयोग ने कोई गंभीर प्रयास नहीं किया है।

तेजी से बढ़ा राजनीति में आपराधिकरण

राजनीति में बढ़ते आपराधिकरण पर चिंता जाहिर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीते चार आम चुनाव से राजनीति में आपराधिकरण तेजी से बढ़ा है। इससे पहले पोल पैनल ने कोर्ट को बताया था कि 2004 में 24% सांसदों की पृष्ठभूमि आपराधिक थी, लेकिन 2009 में ऐसे सांसदों की संख्या बढ़कर 30 पर्सेंट और 2014 में 34 पर्सेंट हो गई। चुनाव आयोग के मुताबिक, मौजूदा लोकसभा में 43 पर्सेंट सांसदों के खिलाफ गंभार अपराध के मामले लंबित हैं।

Share.

Comments are closed.