राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में वर्तमान में 50 प्रतिशत से भी कम कर्मचारी है। कोटा निवासी आरटीआई कार्यकर्ता सुजीत स्वामी की याचिका में यह खुलासा हुआ है कि विश्वविद्यालय में 63 प्रतिशत शिक्षण पद खाली हैं।

विश्वविद्यालय में गैर-शिक्षण कर्मचारियों के 382 पदों में से केवल 187 पदों पर ही भर्तियां हुई है। इनमें परीक्षा नियंत्रक, निदेशक, डीन और छात्र कल्याण अधिकारी के जैसे महत्वपूर्ण पद भी शामिल हैं। वर्तमान में, प्रोफेसरों के 37 स्वीकृत पदों में से केवल 10 पद ही भरे गए है।

इसी तरह, 68 सहयोगी प्रोफेसर के पदों में से केवल 19 पर ही भर्तियां की गई है। सहयोगी प्रोफेसर के 49 पद अब भी खाली हैं। सहायक प्रोफेसर के 156 पदों में से केवल 67 पद ही भरे गए है।

यूनिवर्सिटी में पेट्रोकेमिकल, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और एमबीए कोर्स के सभी 25 पद खाली हैं। आरटीआई के जवाब में जानकारी सामने आई है कि विश्वविद्यालय ने साल 2011, 2013, 2014 और 2018 में भी कई पदों पर आवेदन आमंत्रित किए हैं, पर उम्मीदवारों द्वारा परीक्षा शुल्क का भुगतान करने के बाद चयन प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। 

आरटीआई के माध्यम से खुलासा हुआ है कि साल 2011 और 2018 के बीच विश्वविद्यालय ने 36,230 उम्मीदवारों के परीक्षा शुल्क से 1.05 करोड रुपये का राजस्व अर्जित किया।

इस अंतराल में केवल साल 2018 में परीक्षा का आयोजन किया गया। इस वर्ष, 41 शिक्षण पदों और 19 गैर-शिक्षण पदों पर भर्तियां की गई। ये भर्तियां साल 2014 के विज्ञापन के आधार पर की गई थी। 

वर्तमान में, विश्वविद्यालय के कुल 643 पदों में से केवल 44 प्रतिशत पदों यानी 283 पदों पर ही भर्तियां की गई है। रिक्तियों के बारे में पूछे जाने पर कुलपति राम अवतार गुप्ता ने बताया कि हमने सरकार को खाली पदों को भरने की अनुमति के लिए लिखा है।

वित्तीय स्वीकृति प्राप्त होने के बाद, हम भर्ती के लिए प्रक्रिया शुरू करेंगे। साथ ही, स्थानीय भाजपा विधायक संदीप शर्मा ने इस मुद्दे को राज्य विधानसभा में उठाने का आश्वासन दिया है।

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